हलवा

ताऊ भी रोज ताई से हलवा बनवाकर
खाते थे । लेकिन एक दिन ताई ने
हलवा नहीं बनाया । ताऊ
को गुस्सा आ गया और वो आंख बंद कर
लेट गया । तभी वहां भीड़ लग गई । सब
सोचने लगे –ये ताऊ
को क्या हो गया । किसी ने कहा –
अरे मूंह पर पानी मारो । कोई
बोला –भाई जूता सुन्घाओ । कोई
कुछ उपाय बता रहा था कोई कुछ । इतने में एक समझदार
सा आदमी बोला –अरै ताऊ ने हलवा खिला दो ।
ताऊ ने अपनी एक आँख खोली और बोला उस आदमी की भी सुड ल्यो कोई

ताऊ बस अडडे पै खडया था

एक बार एक ताऊ बस अडडे पै खडया था
इतनें में एक मंगता ताऊ धोरे आकै खडया हो ग्या
अर कटौरा सामी करके मांगण ला ग्या
बोल्या बोल्या ताऊजी जी खौल कै पांच रूपये
का सिक्का
दे देयो
ताऊ बोल्या आं रै जो पैसे इक्टठे करै है
उसका कै करैगा
के जुआ खेलैगा….
मंगता … ना ताऊ जी
ताऊ … तो के दारू पीवैगा
मंगता… ना ताऊजी
ताऊ …. तो सुल्फा पीवैगा
मंगता …. ना ताऊ जी
ताऊ … तो के हुक्का पीवैगा
मंगता … ना ताऊ जी
ताऊ … तो न्यू कर म्हारै घरां चाल
मंगता … क्यू ताऊ किमें काम है..
ताऊ … काम तो किमें ना है पर तेरी ताई नै
दिखाण चाहु सु
अक जो आदमी ये काम ना करै उसकी के हालत
हो ज्या सै…..

आम की ड्राइंग

एक बार मास्टर ने क्लास म बालका त आम की ड्राइंग बनान की कही ….

सारे बालक मंड गे बनान….

अपना रलदु बिचारा बोल बाला काख मे हाथ गोये बेठ्या रहया…

मास्टर गया उस ध्होरे अक बेटा रलदु के बात होई बनाता क्यू ना… ?

रलदु :- मास्टर जी मै न्यू सोचू सूं अक साबत आम की ब
नाऊँ ड्राइंग या फेर चूसे ओड़ की….