यो मेरा फरैंड सै..

पहले सेमेस्टर के पेप्पर ख़तम होया पाछै रामरती जब घरां आई तै एक दिन उसकी माँ बोल्ली….
-आँ ए, तन्नै कितनी वार हो ली ….किस्तै बत्लावै है फोन पै ??!

-माँ यो मेरा फरैंड सै..
-ए भाईरोई रांड …!!~~ डटज्या तन्नै मैं बणाऊ तेरा ‘फरैंड’

अर न्यू कहे पाछै …. ठा कै फूकणी रामरती के लील्ले तै मंगर बणा दिए अर ले कै जूत भटा-भट सिर के सारे ढेरे मार दिए.

जब College शुरू होए तो रामरति की एक ओड़ की सेल्ली सूज री,एक कान लाल होरया …अर गलूरे और मेल के हो रे.

-Hi ‘रति'(रामरती) ये तेरे Face को क्या हो गया Yaar

-Yaar वो मैं घर में “पैडकाले” से मेरा पाँव “रिपट” गया और मैं Face के ‘तान’ गिर पड़ी !!

राजा का चुनाव

जंगल म्ह राजा का चुनाव होया अर उसमैं बांदर जीत ग्या। बांदर का राजा बणना शेर तै बर्दाश्त कोनी होया। इस छोंह म्ह वो बकरी के बच्चे नै ठा लेग्या।
बकरी बांदर धौरे आई अर रोंदी-रोंदी बोल्ली – राजा साब शेरे मेरे बच्चे नै ठा के लेग्या थाम उसती बचा ल्यो।
बांदर एक पेड़ तै दूसरे पेड़ पै छाल मारण लाग्या।
बकरी बोल्ली – जी थाम तोले से जाओ इतणे म्ह तो वो शेरे मेरे बच्चे नै खा जावैगा।
बांदर बोल्या – न्यूं खावैगा तो खावैएगा मेरी भागदौड़ मैं कमी हो तो बता !!

हरियाणा में दामाद

हरियाणा में एक दामाद सर्दियों के दिनों में अपने ससुराल गया,
उसकी पत्नी का नाम था दामो, और उसकी साली का नाम था बिदामो
तो उस गाँव में रिवाज़ ये था कि, दामाद अपनी पत्नी से मिलना तो दूर आमने सामने देख भी नहीं सकता था !
इस रिवाज़ को तोड़ने के लिये और बीवी दामो से मिलाने के लिये दामाद ने इशारे में दो पंक्तिया कहीं :–
” उड़ता पंछी बोल रिया स अबकी पाळा खूब पडेगा,
दो जण मिल के सोते रहियो, नहीं ते एक जरूरू मरेगा !”
सास समझ गई कि, दामाद क्या इशारा कर रहा है !
उसने भी जवाब दिया :–
” दामो संग बिदामो सोयेगी, और तेरे संग तेरा साळा,
मैं बूढे संग पड़ी रहूँगी, के कर लेगा पाळा !”